बालाघाट जिला के तहसील लांजी डोंगरगांव में यूरेनियम की खोज 2002 से 2026 तक क्या है पूरी सच्चाई
बालाघाट जिला के तहसील लांजी डोंगरगांव में यूरेनियम की खोज 2002 से 2026 तक क्या है पूरी सच्चाई
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बालाघाट मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश का बालाघाट जिला लंबे समय से अपनी खनिज संपदा
के लिए देशभर में जाना जाता है। यहां मैंगनीज तांबा और अन्य खनिजों की मौजूदगी ने
इस जिले को भू विज्ञान और खनिज अन्वेषण के लिए महत्वपूर्ण बनाया है। लेकिन बालाघाट
की खनिज संपदा से जुड़ी एक और चर्चा समय-समय पर सामने आती रही है यूरेनियम की
संभावित मौजूदगी।
हाल के वर्षों में खास तौर पर लांजी तहसील के ग्राम
डोंगरगांव और उसके आसपास के क्षेत्र को लेकर यह
सवाल फिर चर्चा में आया है कि क्या यहां यूरेनियम मौजूद है? क्या सरकार ने इसकी खोज
शुरू कर दी है क्या यहां
यूरेनियम का बड़ा भंडार मिला है और यदि खोज चल रही है तो इसकी वर्तमान स्थिति क्या है
इन सवालों का जवाब सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर देखने पर तस्वीर काफी रोचक लेकिन
सावधानी वाली सामने आती है। उपलब्ध रिकॉर्ड यह जरूर बताते हैं कि लांजी क्षेत्र में यूरेनियम की संभावित उपस्थिति को लेकर बहुत पहले से
भूगर्भीय जांच और अन्वेषण की रुचि रही है। इसके अलावा
हालिया सरकारी रिकॉर्ड में लोहारा डोंगरगांव बालाघाट को यूरेनियम अन्वेषण के नए क्षेत्रों में शामिल किया गया है। लेकिन अभी उपलब्ध
आधिकारिक जानकारी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि डोंगरगांव में कोई विशाल या
व्यावसायिक यूरेनियम भंडार प्रमाणित हो चुका है।
डोंगरगांव कहां स्थित है
सबसे पहले उस स्थान को स्पष्ट करना जरूरी है क्योंकि देश के अलग अलग राज्यों
में डोंगरगांव नाम के कई स्थान हैं।
यहां जिस डोंगरगांव की बात हो रही है वह मध्य प्रदेश के बालाघाट
जिले की लांजी तहसील का ग्राम डोंगरगांव है। मध्य
प्रदेश शासन के बालाघाट जिला प्रशासन की वेबसाइट पर डोंगरगांव को लांजी क्षेत्र के
अंतर्गत सूचीबद्ध किया गया है और उसका पिन कोड 481222 दिया गया है।
2011 की जनगणना संबंधी उपलब्ध आंकड़ों में भी डोंगरगांव को तहसील लांजी जिला बालाघाट के गांव के रूप में दर्ज किया गया है।
इसलिए जब हालिया सरकारी रिकॉर्ड में लोहार डोंगरगॉव जिला बालाघाट
लिखा मिलता है तो इसे छत्तीसगढ़ के
राजनांदगांव जिले वाले डोंगरगांव से अलग समझना जरूरी है।
2002 में ही उठ चुका था यूरेनियम खोज का मुद्दा
बालाघाट के लांजी क्षेत्र में यूरेनियम की चर्चा कोई नई खबर नहीं है। इसके
प्रमाण संसद के पुराने रिकॉर्ड में भी मिलते हैं।
26 फरवरी 2002 को लोकसभा के रिकॉर्ड में (Need to
complete survey for uranium reserves in Lanji Tehsil of Balaghat district Madhya Pradesh ) शीर्षक से मामला दर्ज हुआ था। इसमें तत्कालीन
सांसद प्रहलाद सिंह पटेल ने लांजी तहसील में यूरेनियम के संभावित भंडार को लेकर
किए गए भूगर्भीय परीक्षणों का मुद्दा उठाया था।
उस समय संसद में रखे गए विवरण के अनुसार बालाघाट जिले की लांजी तहसील में यूरेनियम की संभावना को
देखते हुए भूगर्भीय परीक्षण किए गए थे। रिकॉर्ड में यह भी कहा गया कि उस समय
क्षेत्र की सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों के कारण कुछ परीक्षण प्रभावित हुए थे।
इसलिए सरकार से आगे अनुसंधान पूरा करने की मांग की गई थी।
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है।
संसद में किसी क्षेत्र में यूरेनियम के भंडार मिलने की संभावना का उल्लेख होना और
वैज्ञानिक रूप से व्यावसायिक
यूरेनियम संसाधन प्रमाणित होना एक ही बात नहीं है।
2002 का रिकॉर्ड यह साबित करता है कि लांजी क्षेत्र को यूरेनियम
की दृष्टि से जांच योग्य माना गया था। लेकिन यह अपने आप में यह प्रमाणित नहीं करता
कि उस समय कोई बड़ा खनन योग्य भंडार घोषित हो गया था।
तो फिर डोंगरगांव
का नाम क्यों महत्वपूर्ण हो गया
यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत काम करने वाले Atomic Minerals Directorate for Exploration and Research यानी AMD
द्वारा देश के
विभिन्न संभावित क्षेत्रों में परमाणु खनिजों की खोज की जाती है।
हालिया लोकसभा रिकॉर्ड में मध्य प्रदेश के जिन नए क्षेत्रों में AMD ने यूरेनियम के
लिए अन्वेषण शुरू किए जाने की जानकारी दी है उनमें (Lohara
– Dongargaon Balaghat district ) भी शामिल है।
इसका मतलब यह है कि डोंगरगांव का नाम केवल सोशल मीडिया या स्थानीय चर्चा के
कारण नहीं आया है। सरकारी संसदीय रिकॉर्ड में
लोहारा–डोंगरगांव, बालाघाट को यूरेनियम अन्वेषण क्षेत्र के रूप में दर्ज किया
गया है।
यही कारण है कि आज डोंगरगांव और लांजी को लेकर यूरेनियम की चर्चा पहले की
तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण दिखाई देती है।
अब इसका क्या मतलब डोंगरगांव में यूरेनियम मिल गया ?
इस सवाल का जवाब बहुत सावधानी से देना जरूरी है।
नहीं उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर अभी यह कहना
सही नहीं है कि डोंगरगांव में विशाल यूरेनियम भंडार मिल गया है।
सरकारी भाषा में exploration यानी अन्वेषण और established resource यानी प्रमाणित
संसाधन अलग अलग चरण हैं।
अन्वेषण के दौरान वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि किसी क्षेत्र
की चट्टानों और भूगर्भीय संरचनाओं में किसी विशेष खनिज की उपस्थिति के संकेत हैं
या नहीं। इसके बाद जरूरत के अनुसार अधिक विस्तृत वैज्ञानिक जांच की जाती है। यदि
पर्याप्त मात्रा गुणवत्ता और
अन्य आर्थिक तकनीकी मानदंड पूरे होते हैं, तभी किसी खनिज संसाधन को आगे के चरणों में ले
जाया जा सकता है।
इसलिए डोंगरगांव के संबंध में फिलहाल सबसे सही शब्द यूरेनियम अन्वेषण या यूरेनियम
की संभावित उपस्थिति की जांच है।
बालाघाट के भूवैज्ञानिक संग्रहालय में भी यूरेनियम से जुड़ा
नमूना
बालाघाट में यूरेनियम से संबंधित चर्चा को एक और स्थानीय संदर्भ मिलता है।
मध्य प्रदेश शासन की बालाघाट जिला प्रशासन की
आधिकारिक वेबसाइट पर भूवैज्ञानिक संग्रहालय
की जानकारी दी गई है। संग्रहालय में अलग अलग चट्टानों खनिजों और जीवाश्मों के नमूने रखे गए हैं।
संग्रहालय के Showcase 7 में मिश्रित नमूनों के
अंतर्गत pegmatite
with uranium यानी यूरेनियम के साथ पेगमेटाइट का नमूना प्रदर्शित होने की जानकारी दी गई है।
यह तथ्य महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि बालाघाट के भूवैज्ञानिक
संग्रह में यूरेनियम से संबंधित नमूना मौजूद है।
लेकिन यहां भी वही सावधानी जरूरी है।
संग्रहालय में यूरेनियम वाला भूवैज्ञानिक नमूना होना और
किसी गांव के नीचे बड़े यूरेनियम भंडार की पुष्टि होना अलग अलग बातें हैं।
संग्रहालय में देश के विभिन्न स्थानों से प्राप्त अनेक प्रकार के खनिज और
चट्टानों के नमूने रखे गए हैं। इसलिए केवल इस नमूने के आधार पर डोंगरगांव में बड़े
भंडार की घोषणा नहीं की जा सकती।
बालाघाट पहले से ही खनिज संपदा के लिए प्रसिद्ध है
यूरेनियम की चर्चा को समझने के लिए बालाघाट की पूरी भूवैज्ञानिक पृष्ठभूमि को
समझना भी जरूरी है।
बालाघाट जिला लंबे समय से मैंगनीज और तांबे जैसे खनिजों के लिए प्रसिद्ध रहा है। जिला प्रशासन के भूवैज्ञानिक संग्रहालय
की जानकारी में स्थानीय संग्रह के रूप में भारवेली से मैंगनीज और मलाजखंड से तांबे के अयस्क के नमूनों का
उल्लेख मिलता है।
यानी बालाघाट की जमीन पहले से ही खनिज दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसी वजह से
यहां अलग अलग समय पर विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा भूगर्भीय अध्ययन और खनिज
अन्वेषण होना असामान्य बात नहीं है।
अब सवाल है यूरेनियम की खोज कौन करता है ?
भारत में यूरेनियम जैसे परमाणु खनिजों की खोज में Atomic
Minerals Directorate for Exploration and Research (AMD) की महत्वपूर्ण भूमिका है।
यह परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत कार्य करता है।
AMD देश के अलग अलग भूगर्भीय क्षेत्रों में सर्वेक्षण और
अन्वेषण करता है। इसके वर्तमान डैशबोर्ड में भी यूरेनियम अन्वेषण के लिए व्यापक
सर्वेक्षण और भू-वेधन गतिविधियों का विवरण उपलब्ध है।
इसलिए डोंगरगांव के मामले में भी किसी स्थानीय अफवाह सोशल मीडिया पोस्ट या केवल चट्टान के नमूने के आधार पर
निष्कर्ष निकालने की बजाय AMD और भारत सरकार
के आधिकारिक रिकॉर्ड को प्राथमिकता देना सबसे उचित तरीका है।
2026 में मामले की स्थिति क्या है ?
2026 तक उपलब्ध रिकॉर्ड को देखने पर यह कहा जा सकता है कि
बालाघाट के लांजी क्षेत्र में यूरेनियम को लेकर रुचि कई चरणों में सामने आई है।
पहला महत्वपूर्ण चरण 2002 के आसपास दिखाई देता है जब लांजी तहसील में यूरेनियम की
संभावित उपस्थिति को लेकर किए गए भूगर्भीय परीक्षणों और उन्हें पूरा करने की
आवश्यकता का मामला संसद में उठा।
दूसरा महत्वपूर्ण चरण वह है जब ( Lohara–Dongargaon Balaghat district ) को AMD के नए यूरेनियम अन्वेषण क्षेत्रों में शामिल किया गया। यह वर्तमान समय के लिए
सबसे महत्वपूर्ण आधिकारिक संकेतों में से एक है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि डोंगरगांव क्षेत्र को यूरेनियम अन्वेषण की दृष्टि
से गंभीरता से लिया गया है।
लेकिन 2026 तक उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर डोंगरगांव में
किसी बड़े व्यावसायिक यूरेनियम भंडार की अंतिम सरकारी घोषणा सामने नहीं आती।
तो क्या आगे यहां
बड़ी खोज हो सकती है ?
वैज्ञानिक दृष्टि से किसी संभावित खनिज क्षेत्र में अन्वेषण का उद्देश्य ही
यही होता है कि आगे की जांच से वास्तविक स्थिति सामने आए।
यदि किसी क्षेत्र में प्रारंभिक भूवैज्ञानिक संकेत मिलते हैं तो वैज्ञानिक अध्ययन आगे
बढ़ सकता है। इसके बाद यह पता लगाया जाता है कि खनिज की उपस्थिति कितनी व्यापक है
और उसका स्वरूप क्या है।
लेकिन किसी भी संभावित खनिज क्षेत्र के बारे में अंतिम निष्कर्ष वैज्ञानिक जांच पूरी होने और आधिकारिक संसाधन आकलन के बाद ही
निकाला जाना चाहिए।
इसलिए डोंगरगांव के लोगों के लिए अभी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिना पुष्टि के बहुत बड़ा यूरेनियम
भंडार मिल गया जैसी खबरों पर भरोसा न
करें।
तो क्या इससे
डोंगरगांव और लांजी का महत्व बढ़ गया है ?
हां भूवैज्ञानिक दृष्टि से यह क्षेत्र निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है।
यदि किसी क्षेत्र को भारत सरकार की परमाणु खनिज अन्वेषण एजेंसी द्वारा
यूरेनियम अन्वेषण के लिए शामिल किया जाता है तो इसका अर्थ है कि वैज्ञानिक दृष्टि से उस क्षेत्र में
जांच की संभावना या आवश्यकता देखी गई है।
लेकिन स्थानीय लोगों के लिए इसका अर्थ तुरंत खनन शुरू होना नहीं है।
किसी भी खनिज अन्वेषण परियोजना में वैज्ञानिक प्रशासनिक पर्यावरणीय कानूनी और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं अलग अलग चरणों में होती
हैं। इसलिए केवल अन्वेषण क्षेत्र घोषित होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जाना
चाहिए कि वहां जल्द ही खदान शुरू हो जाएगी।
सबसे बड़ी गलतफहमी यूरेनियम का नमूना बनाम यूरेनियम
का भंडार
डोंगरगांव और बालाघाट की चर्चा में यही सबसे महत्वपूर्ण अंतर है।
अगर किसी चट्टान के नमूने में यूरेनियम से संबंधित खनिज या संकेत मिलता है तो
वैज्ञानिक उसके आधार पर आगे की जांच कर सकते हैं।
लेकिन भंडार कहने के लिए सिर्फ एक नमूना
पर्याप्त नहीं होता।
भंडार के आकलन में भूगर्भीय संरचना खनिज की निरंतरता मात्रा गुणवत्ता और अनेक वैज्ञानिक एवं तकनीकी पहलुओं का अध्ययन
जरूरी होता है।
इसलिए सोशल मीडिया पर यदि कोई यह लिखता है कि बालाघाट के डोंगरगांव में यूरेनियम की बड़ी खान
मिल गई तो उस दावे को
तब तक सत्य नहीं माना जाना चाहिए जब तक संबंधित सरकारी वैज्ञानिक संस्था इसकी
आधिकारिक पुष्टि न करे।
अब 2002 से 2026 तक पूरी कहानी
एक नजर में
2002 लोकसभा रिकॉर्ड में लांजी तहसील में यूरेनियम की संभावित
उपस्थिति को लेकर किए गए भूगर्भीय परीक्षणों और सर्वेक्षण को पूरा करने की मांग का
उल्लेख मिलता है।
इसके बाद बालाघाट क्षेत्र की भूवैज्ञानिक और खनिज संरचना
का अध्ययन विभिन्न स्तरों पर जारी रहा।
भूवैज्ञानिक संग्रहालय बालाघाट जिला प्रशासन की वेबसाइट पर संग्रहालय के एक शोकेस
में यूरेनियम के साथ पेगमेटाइट का नमूना प्रदर्शित होने की जानकारी मौजूद है।
हालिया सरकारी चरण भारत सरकार के संसदीय रिकॉर्ड में AMD द्वारा मध्य
प्रदेश में नए यूरेनियम अन्वेषण क्षेत्रों की सूची में लोहरा डोंगरगॉव बालाघाट जिला
( Lohara–Dongargaon Balaghat district )का नाम शामिल है।
2026 तक उपलब्ध रिकॉर्ड से डोंगरगांव क्षेत्र में यूरेनियम अन्वेषण
की सरकारी गतिविधि की पुष्टि होती है लेकिन बड़े व्यावसायिक यूरेनियम भंडार की अंतिम घोषणा का
प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
निष्कर्ष डोंगरगांव
में यूरेनियम की कहानी अभी पूरी नहीं हुई है
बालाघाट जिले की लांजी तहसील का ग्राम
डोंगरगांव अब यूरेनियम अन्वेषण की चर्चा में इसलिए
महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि यह क्षेत्र केवल स्थानीय चर्चा तक सीमित नहीं है।
संसद के पुराने रिकॉर्ड में लांजी तहसील में यूरेनियम की संभावित उपस्थिति को लेकर
भूगर्भीय परीक्षणों का उल्लेख मिलता है जबकि हालिया सरकारी रिकॉर्ड में लोहारा – डोंगरगांव
बालाघाट को यूरेनियम अन्वेषण के नए क्षेत्रों में शामिल किया गया है।
बालाघाट के सरकारी भूवैज्ञानिक संग्रहालय में यूरेनियम के साथ पेगमेटाइट का
नमूना प्रदर्शित होने की जानकारी भी इस क्षेत्र की भूवैज्ञानिक रुचि को समझने में
मदद करती है।
लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे जरूरी निष्कर्ष यही है कि संकेत और अन्वेषण को बड़ा
भंडार मिलने के बराबर नहीं माना जा सकता।
इस समय सबसे सही और तथ्यात्मक बात यह है कि लांजी के
डोंगरगांव क्षेत्र में यूरेनियम की खोज / अन्वेषण से जुड़ी सरकारी गतिविधि का
रिकॉर्ड मौजूद है और क्षेत्र को वैज्ञानिक जांच के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।
आगे की वैज्ञानिक जांच ही यह तय करेगी कि यहां वास्तव में कितना और किस स्तर का
यूरेनियम संसाधन मौजूद है।
इसलिए यदि भविष्य में AMD या भारत सरकार की ओर से डोंगरगांव के संबंध में कोई नई
आधिकारिक रिपोर्ट संसाधन आकलन या
खोज की घोषणा आती है तभी इस क्षेत्र में यूरेनियम की वास्तविक स्थिति पर अंतिम
निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।
Bat Duniya Ki के
पाठकों के लिए खास बात
डोंगरगांव को
लेकर खबर लिखते समय बालाघाट में यूरेनियम
का विशाल भंडार मिल गया लिखने के बजाय बालाघाट के लांजी क्षेत्र के डोंगरगांव में
यूरेनियम अन्वेषण सरकारी रिकॉर्ड
में क्षेत्र शामिल जैसे तथ्यात्मक शब्दों का इस्तेमाल करना अधिक सही और
विश्वसनीय रहेगा। इससे खबर सनसनीखेज होने के बजाय तथ्य आधारित रहेगी और पाठकों को
वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी।
आधिकारिक रिकॉर्ड और संदर्भ
- भारत
सरकार / लोकसभा रिकॉर्ड में( लोहरा डोंगरगॉव बालाघाट ) Lohara–Dongargaon Balaghat district को
यूरेनियम अन्वेषण के नए क्षेत्रों में शामिल किया गया है।
- संसद के 2002
के रिकॉर्ड में लांजी
तहसील में यूरेनियम की संभावित उपस्थिति और भूगर्भीय परीक्षणों का उल्लेख है।
- बालाघाट
जिला प्रशासन के आधिकारिक भूवैज्ञानिक संग्रहालय में यूरेनियम के साथ पेगमेटाइट का नमूना
प्रदर्शित होने की जानकारी है।
- बालाघाट
जिला प्रशासन के रिकॉर्ड में डोंगरगांव को लांजी
क्षेत्र के अंतर्गत सूचीबद्ध किया गया है।
- मेरे ए ब्लॉग जरूर पड़े https://batduniyaki.blogspot.com/2026/08/28.html
अस्वीकरण:- यह लेख उपलब्ध सरकारी और सार्वजनिक वैज्ञानिक रिकॉर्ड के
आधार पर तैयार किया गया है। इसमें यूरेनियम के संभावित अन्वेषण की जानकारी दी गई
है लेकिन किसी
खनिज की खोज मात्रा या
व्यावसायिक भंडार के संबंध में अंतिम निष्कर्ष संबंधित सरकारी वैज्ञानिक संस्थाओं
की आधिकारिक रिपोर्ट पर ही निर्भर करेगा।

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