UPI का नया अपडेट 2026 मे आम यूजर्स के लिए क्या है बदलाव क्या नहीं देना होगा अतिरिक्त सुल्क आम यूजर्स को ?
क्या है UPI का नया अपडेट 2026 ₹2,000 से ज्यादा भुगतान पर MDR और आम यूजर्स के लिए क्या बदलाव क्या नहीं देना होगा अतिरिक्त सुल्क
भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके Unified
Payments Interface यानी UPI को लेकर सितंबर 2026 में एक महत्वपूर्ण अपडेट
सामने आया है। नए UPI फ्रेमवर्क के तहत कुछ बड़े व्यापारी भुगतान पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू किया गया है। इसके बाद
लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब UPI से पैसे भेजने पर भी चार्ज
देना पड़ेगा
सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार ऐसा नहीं है। व्यक्ति से
व्यक्ति (P2P) UPI भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहेगा। इसके अलावा ₹2,000
तक के व्यापारी
भुगतान भी MDR से मुक्त रहेंगे। छोटे व्यापारियों के लिए भी Zero-MDR
की व्यवस्था
जारी रहेगी।
इसलिए UPI के नए नियम को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि MDR
किस भुगतान पर
लागू होगा ग्राहक पर इसका
क्या असर पड़ेगा और छोटे दुकानदारों के लिए क्या व्यवस्था की गई है।
UPI है क्या
UPI का पूरा नाम Unified Payments Interface भारत की डिजिटल
भुगतान प्रणाली है जिसे नैशनल पेमेंट
कारपोरेशन ऑफ इंडिया मतलब NPCI संचालित करता है। इसके माध्यम से मोबाइल फोन से
बैंक खाते से सीधे दूसरे व्यक्ति या व्यापारी को पैसे भेजे जा सकते हैं।
UPI ने भारत में डिजिटल भुगतान को काफी आसान बनाया है। QR
Code स्कैन करके भुगतान करना मोबाइल नंबर या UPI ID से पैसे भेजना और ऑनलाइन
खरीदारी के दौरान UPI का इस्तेमाल करना आज सामान्य हो चुका है।
अगस्त 2026 में UPI ने अपने संचालन के 10 वर्ष पूरे किए। सरकारी
आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2026 में UPI के माध्यम से 2,366 करोड़ लेन-देन हुए जिनका कुल
मूल्य लगभग ₹29.88 लाख करोड़ रहा।
नया UPI अपडेट क्या है
15 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार ने UPI के नए MDR फ्रेमवर्क को
लेकर जानकारी जारी की।
इसके अनुसार
- व्यक्ति
से व्यक्ति यानी P2P भुगतान
मुफ्त रहेगा।
- ₹2,000
तक के व्यापारी भुगतान पर MDR नहीं
लगेगा।
- निर्धारित
श्रेणी के छोटे व्यापारियों के भुगतान पर Zero-MDR व्यवस्था
जारी रहेगी।
- ₹2,000
से अधिक के कुछ व्यापारी भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा।
- ₹75,000
या उससे अधिक के ऐसे लेन-देन में MDR की अधिकतम
सीमा ₹300 प्रति
लेन-देन होगी।
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि MDR ग्राहक से लिया
जाने वाला टैक्स नहीं है।
अब MDR होता क्या है
MDR का पूरा नाम Merchant
Discount Rate है। यह व्यापारी भुगतान से संबंधित भुगतान प्रणाली का शुल्क है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR को सरकार या NPCI द्वारा वसूला जाने वाला
टैक्स नहीं माना जाना चाहिए। यह भुगतान प्रणाली में शामिल विभिन्न भागीदारों जैसे
बैंक भुगतान सेवा
प्रदाता और UPI ऐप प्रदाताओं के बीच वितरित किया जाता है।
इसका मतलब है कि किसी व्यक्ति द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति को UPI से पैसे भेजने
पर इस नए MDR नियम के कारण अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
क्या अब ₹2,000
से ज्यादा UPI करने पर ग्राहक को पैसे देने होंगे
नहीं।
यह सबसे महत्वपूर्ण बात है जिसे UPI यूजर्स को समझना चाहिए।
अगर कोई व्यक्ति अपने दोस्त परिवार के सदस्य या किसी दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में UPI
से ₹5,000
भेजता है तो
केवल राशि ₹2,000 से अधिक होने के कारण MDR नहीं लगेगा।
सरकार ने साफ किया है कि सभी P2P UPI लेन देन राशि की परवाह किए बिना मुफ्त रहेंगे।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि अब ₹2,000 से ज्यादा UPI भेजने पर
ग्राहक से चार्ज लिया जाएगा।
दुकानदार को ₹2,000 से ज्यादा भुगतान करने पर
क्या होगा
यहां नियम अलग है।
जब कोई ग्राहक किसी व्यापारी या दुकान को UPI के माध्यम से भुगतान करता
है तो इसे Person to Merchant
मतलब P2M transaction कहा जाता है।
नए फ्रेमवर्क के तहत निर्धारित P2M लेन देन में
₹2,000 तक MDR नहीं।
₹2,000 से अधिक 0.4% MDR लागू हो सकता है।
₹75,000 या अधिक MDR अधिकतम ₹300 प्रति लेन देन तक सीमित
रहेगा।
उदाहरण के तौर पर यदि कोई निर्धारित श्रेणी का व्यापारी ₹10,000 का UPI भुगतान प्राप्त
करता है तो 0.4% की दर के हिसाब से MDR ₹40 होगा। यह ग्राहक द्वारा अलग
से UPI चार्ज के रूप में भुगतान किया जाने वाला शुल्क नहीं है।
तो क्या हर
दुकानदार को MDR देना होगा
जी नहीं
नए नियम में छोटे व्यापारियों को राहत देने के लिए Zero-MDR व्यवस्था जारी
रखी गई है।
सरकारी जानकारी के अनुसार Person to Person Merchant यानी P2PM श्रेणी के तहत UPI
QR Code से प्रति माह ₹1 लाख तक भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारी Zero-MDR
व्यवस्था में
बने रहेंगे। इसमें सड़क किनारे सामान बेचने वाले और छोटे स्थानीय दुकानदार भी
शामिल हो सकते हैं यदि वे संबंधित श्रेणी की शर्तों के अंतर्गत आते हैं।
सरकार के अनुसार लगभग 96 प्रतिशत merchant
UPI transactions इस MDR व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे। MDR केवल लगभग 4
प्रतिशत merchant
transactions पर लागू होगा।
जरूरी सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था
कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग MDR व्यवस्था रखी
गई है।
इनमें प्रमुख रूप से
- रेलवे
- टेलीकॉम
- बीमा
- ईंधन
- कृषि
इनपुट
जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
इन क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के निर्धारित UPI व्यापारी भुगतान पर ₹5 प्रति लेन देन का फ्लैट MDR लागू होगा।
इसका उद्देश्य इन आवश्यक सेवाओं में भुगतान लागत को एक निश्चित स्तर पर रखना
बताया गया है।
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड से जुड़े भुगतान
नए फ्रेमवर्क में कैपिटल मार्केट ट्रैन्सैक्शन (Capital Market transactions )के लिए भी अलग
दर निर्धारित की गई है।
म्यूचुअल फंड सेकुरेटी स्टोकबरोकेर और
डिलर्स से संबंधित
निर्धारित भुगतान पर 0.02% MDR की दर लागू होगी और इसकी
अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेन-देन होगी।
इसका मतलब है कि सभी UPI भुगतान के लिए एक ही MDR दर नहीं है। भुगतान की
प्रकृति और क्षेत्र के अनुसार अलग व्यवस्था हो सकती है।
तो क्या UPI
अब महंगा हो जाएगा
आम UPI उपयोगकर्ता के लिए तस्वीर अलग है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि
व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान मुफ्त रहेगा।
₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान मुफ्त रहेंगे।
छोटे व्यापारियों के लिए Zero-MDR व्यवस्था जारी
रहेगी।
UPI ऐप को ग्राहकों से अलग से प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए शुल्क
लेने की अनुमति नहीं है।
इसलिए सोशल मीडिया पर यदि कोई संदेश यह दावा करता है कि अब ₹2,000 से ज्यादा UPI करने पर हर
ग्राहक से शुल्क लिया जाएगा तो उसे बिना जांचे आगे भेजना सही नहीं होगा।
तो क्या दुकानदार
ग्राहक से MDR वसूल सकता है
सरकार की जानकारी के अनुसार बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि
व्यापारी MDR की लागत ग्राहकों पर न डालें। साथ ही UPI ऐप प्रदाताओं को platform
fee या hidden
charges लगाने से रोकने की बात कही गई है।
इसलिए MDR को ग्राहक के लिए नया UPI transaction charge समझना सही नहीं
है।
UPI की लोकप्रियता कितनी बढ़ी है
पिछले कुछ वर्षों में UPI भारत के डिजिटल भुगतान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में UPI के माध्यम से 24,162 करोड़ लेन देन हुए और इनका
मूल्य लगभग ₹314 लाख करोड़ रहा। जून 2026 तक UPI उपयोगकर्ताओं की संख्या लगभग 55.49
करोड़ बताई गई थी।
जुलाई 2026 में UPI ने मासिक लेन देन की संख्या में नया रिकॉर्ड बनाया और लगभग 2,366
करोड़ लेन-देन
दर्ज किए गए।
UPI अब केवल भारत तक सीमित नहीं है। अगस्त 2026 की सरकारी
जानकारी के अनुसार UPI से जुड़े भुगतान की सुविधा 11 देशों में उपलब्ध थी।
अब नए बदलाव की
जरूरत क्यों पड़ी
UPI के लेन देन में लगातार वृद्धि के साथ इसके संचालन सुरक्षा साइबर सुरक्षा धोखाधड़ी
रोकने और तकनीकी बुनियादी ढांचे पर भी लगातार निवेश की जरूरत होती है।
अगस्त 2026 में सरकार ने पेमेंट और सेटलमेंट सीस्टम (Payment
and Settlement Systems) Act 2007 में संशोधन से जुड़े प्रावधानों पर भी जानकारी दी थी और कहा
था कि उद्देश्य UPI की दीर्घकालिक स्थिरता तकनीकी विकास और उभरते जोखिमों से
निपटने की क्षमता को मजबूत करना है।
इसके बाद सितंबर में MDR का विस्तृत ढांचा सामने आया।
आम लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बातें
यदि आप सामान्य UPI उपयोगकर्ता हैं तो इन बातों को याद रखें:
- दो
व्यक्तियों के बीच UPI भुगतान मुफ्त रहेगा।
- ₹2,000
तक के व्यापारी भुगतान पर MDR नहीं है।
- कुछ बड़े merchant
transactions पर MDR लागू होगा।
- MDR ग्राहक से
लिया जाने वाला सरकारी टैक्स नहीं है।
- छोटे
व्यापारियों के लिए Zero-MDR व्यवस्था जारी है।
- ₹75,000
या उससे अधिक के निर्धारित P2M लेन देन
में MDR की सीमा ₹300 है।
- रेलवे टेलीकॉम
बीमा ईंधन
और कृषि इनपुट जैसे कुछ क्षेत्रों के लिए अलग ₹5 फ्लैट MDR
व्यवस्था है।
- सरकार के
अनुसार लगभग 96% merchant UPI transactions MDR से
प्रभावित नहीं होंगे।
निष्कर्ष
सितंबर 2026 का UPI अपडेट मुख्य रूप से बड़े और
निर्धारित मर्चेन्ट ट्रैन्सैक्शन (merchant transactions) पर MDR व्यवस्था से जुड़ा है। इसे आम लोगों के हर UPI भुगतान पर नया चार्ज लगने के रूप में समझना सही
नहीं है।
व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले UPI भुगतान मुफ्त रहेंगे। ₹2,000 तक के merchant
payments भी MDR से मुक्त रहेंगे और छोटे व्यापारियों के लिए Zero-MDR व्यवस्था जारी रहेगी।
इसलिए UPI इस्तेमाल करने वाले आम लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश
यही है कि सिर्फ ₹2,000 से अधिक राशि होने के कारण
व्यक्ति से व्यक्ति UPI भुगतान पर कोई नया MDR नहीं लगाया गया है।
हालांकि व्यापारी
भुगतान में राशि और व्यापारी की श्रेणी के अनुसार नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए
किसी भी वायरल मैसेज पर भरोसा करने से पहले वित्त मंत्रालय RBI या NPCI की आधिकारिक जानकारी देखना बेहतर है।

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