अब भारत और रूस हुए करीबी तो क्यों लगी अमेरिका को मिर्ची
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अब भारत और रूस की बढ़ती करीबी से अमेरिका को क्यों लगी मिर्ची

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एक नजर मे
जी हा हाल ही के समय में भारत और रूस के बीच लगातार बढ़ते करीबी चाहे वो रणनीतिकआर्थिक और रक्षा संबंधों ने एक बार फिर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। ऐसे समय में जब अमेरिका चाहता है कि भारत पश्चिमी देशों के साथ और अधिक रणनीतिक साझेदारी बढ़ाए वहीं भारत अपनी पुरानी विदेश नीति रणनीतिक स्वतंत्रता पर कायम दिखाई दे रहा है।
कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों और विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और रूस के बीच बढ़ती नजदीकियां अमेरिका के लिए एक कूटनीतिक चुनौती हैं। हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि यह केवल किसी एक देश के खिलाफ कदम है । भारत लगातार यह स्पष्ट करता आया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर सभी देशों के साथ संबंध रखेगा
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वास्तव में भारत रूस की दोस्ती से अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सदमा मे दल दिया है है आइए पूरे मामले को विस्तार से जानने को कोशिस करते है ।
क्यों इतनी मजबूत है भारत और रूस की दोस्ती
भारत और रूस के संबंध आज कसे ही नहीं बल्कि कई दशकों पुराने हैं । शीत युद्ध के समय से ही दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग का मजबूत रिश्ता रहा है ।
रूस ने कई महत्वपूर्ण अवसरों पर भारत का समर्थन किया है । बदले में भारत ने भी रूस के साथ अपने संबंधों को हमेशा महत्व दिया है ।
आज भी दोनों देशों के बीच सहयोग कई क्षेत्रों में जारी है
- रक्षा के क्षेत्र मे
- ऊर्जा क्षेत्र मे
- परमाणु ऊर्जा क्षेत्र मे
- अंतरिक्ष क्षेत्र मे
- व्यापार क्षेत्र मे
- तेल और गैस क्षेत्र मे
- उर्वरक क्षेत्र मे
- विज्ञान एवं तकनीक क्षेत्र मे
रूस और यूक्रेन युद्ध के बाद भारत का क्या रुख
जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ तब पश्चिमी देशों ने रूस पर भारी आर्थिक प्रतिबंध लगाए ।
अमेरिका और यूरोपीय देशों ने कई देशों से रूस से दूरी बनाने की अपील की।
पर भी भारत ने संतुलित नीति अपनाई ।
भारत ने
- शांति की अपील की
- बातचीत का समर्थन भी किया
- लेकिन रूस से अपने आर्थिक संबंध बनाए रखा
यही कारण है कि भारत रूस से बड़ी मात्रा में रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदता रहा।
इससे भारत को ऊर्जा सुरक्षा मिली और घरेलू बाजार में ईंधन की आपूर्ति स्थिर रखने में बहुत मदद मिली।
हाल के महीनों में भारत और रूस संबंध क्यों फिर चर्चा में आया
हाल ही में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते और उच्च स्तरीय संपर्क देखने को मिले हैं।
इनमें शामिल हैं
- ऊर्जा सहयोग मे
- व्यापार बढ़ाने की योजना मे
- स्थानीय मुद्रा में व्यापार करने मे
- रक्षा उपकरणों की आपूर्ति मे
- परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं मे
- समुद्री सहयोग मे
- आर्कटिक क्षेत्र में संभावित साझेदारी बड़ाने मे
इन कदम से यह साफ संकेत मिलता है कि दोनों देश अपने संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं।
अब अमेरिका को इतना चिंता क्यो
अमेरिका लंबे समय से चाहता है कि भारत इंडो पैसिफिक क्षेत्र में उसका मजबूत रणनीतिक साझेदार बना रहे ।
भारत पहले से ही कई मंचों पर अमेरिका के साथ काम करता रहा है जैसे
- QUAD मे
- तकनीकी सहयोग मे
- रक्षा अभ्यास मे
- सेमीकंडक्टर मे
- अंतरिक्ष मे
- AI के क्षेत्र मे
लेकिन दूसरी ओर भारत रूस के साथ भी मजबूत संबंध बनाए रखा हुआ है
यही संतुलन अमेरिका के लिए चुनौती माना जाता है।
क्या इससे राष्ट्रपति ट्रंप को झटका लग सकता है
यदि राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन की प्राथमिकताओं को देखें तो उनका जोर अक्सर अमेरिका के रणनीतिक हितों और विश्व मे अपना प्रभाव को बढ़ाने पर रहा है।
यदि भारत रूस के साथ ऊर्जा रक्षा और व्यापारिक सहयोग बढ़ाता है तो यह अमेरिका की कुछ रणनीतिक अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
हालांकि ट्रंप को बड़ा झटका जैसी सुर्खियां अधिकतर मीडिया की व्याख्या होती हैं। किसी भी आधिकारिक अमेरिकी बयान में ऐसा शब्द प्रयोग सामान्यतः नहीं किया जाता।
इसलिए यह कहना अधिक उचित होगा कि भारत रूस की बढ़ती निकटता अमेरिका के लिए एक कूटनीतिक चुनौती है न कि किसी एक घटना से जुड़ा बड़ा झटका ।
क्यों भारत आखिर दोनों देशों के साथ संबंध बना के चल रहा है
भारत की विदेश नीति का सबसे बड़ा आधार है
रणनीतिक स्वतंत्रता
इसका अर्थ है
भारत किसी एक शक्ति गुट का हिस्सा बने बिना अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार निर्णय लेता आ रहा है।
यही कारण है कि भारत
- अमेरिका से आधुनिक तकनीक लेता है ।
- रूस से रक्षा सहयोग जारी रखता है।
- फ्रांस से लड़ाकू विमान खरीदता है।
- जापान के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर बनाता है ।
- मध्य पूर्व के देशों के साथ ऊर्जा साझेदारी बढ़ाता है।
क्यों रूस को भारत की जरूरत है
पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस के लिए एशियाई बाजार और भी महत्वपूर्ण हो गए हैं ।
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है ।
रूस के लिए भारत
- बड़ा ऊर्जा बाजार है
- रक्षा साझेदार है
- निवेश का अवसर है
- उभरती अर्थव्यवस्था है
- विश्व के मंचों पर प्रभावशाली सहयोगी है
क्या लाभ मिलता है भारत को रूस से
भारत को रूस से कई महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त होते हैं ।
1. सस्ता कच्चा तेल
भारत को ऊर्जा सुरक्षा मिलती है।
2. रक्षा सहयोग
भारतीय सेना के कई प्रमुख हथियार रूसी मूल के हैं।
3. परमाणु ऊर्जा
रूस भारत में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में सहयोग करता है।
4. उर्वरक
भारतीय कृषि के लिए महत्वपूर्ण।
5. अंतरिक्ष सहयोग
दोनों देशों का वर्षों पुराना सहयोग है।
क्या भारत पर अमेरिका दबाव बना सकता है
अमेरिका पहले भी रूस से रक्षा खरीद को लेकर चिंता व्यक्त करता रहा है।
उदाहरण के तौर पर
- S-400 रक्षा प्रणाली मे
- रूसी तेल खरीद मे
- रक्षा सहयोग मे
लेकिन भारत ने हर बार स्पष्ट किया कि उसके निर्णय राष्ट्रीय हितों के अनुसार होंगे।
भारत ने यह भी कहा है कि वह किसी तीसरे देश के दबाव में अपनी विदेश नीति नहीं बदलेगा।
क्या भारत और अमेरिका के रिश्ते कमजोर हो जाएंगे
ऐसा मानना सही नहीं होगा।
वास्तव में दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
जैसे
- रक्षा के क्षेत्र
- अंतरिक्ष के क्षेत्र
- AI के क्षेत्र
- साइबर सुरक्षा के क्षेत्र
- व्यापार के क्षेत्र
- शिक्षा के क्षेत्र
- सेमीकंडक्टर के क्षेत्र
- स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र
इसलिए भारत और अमेरिका के रिश्ते केवल रूस के मुद्दे पर निर्भर नहीं हैं।
अब चीन का इसमें क्याभूमिका है
चीन का बढ़ता प्रभाव भी इस पूरी रणनीतिक तस्वीर का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अमेरिका चाहता है कि भारत इंडो पैसिफिक क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाए ।
दूसरी ओर रूस और चीन के बीच भी सहयोग बढ़ा है।
भारत ऐसे माहौल में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि उसके सभी प्रमुख देशों के साथ रिश्ते बने रहें।
विश्व के राजनीति में भारत की नई भूमिका
आज भारत केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि विश्व स्तर पर प्रभावशाली देश बन चुका है।
G20 की अध्यक्षता, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था डिजिटल विकास और बढ़ता कूटनीतिक प्रभाव भारत की स्थिति को मजबूत बनाते हैं।
यही कारण है कि अमेरिका रूस यूरोप जापान और मध्य पूर्व के देश भारत के साथ मजबूत रिश्ते बनाए रखना चाहते हैं।
क्या भारत की निर्भरता रूस पर कम होगी
भारत लंबे समय से रक्षा उपकरणों के स्रोतों में विविधता लाने की नीति अपना रहा है।
अब भारत
- स्वदेशी रक्षा उत्पादन बढ़ा रहा है ।
- फ्रांस अमेरिका और इज़राइल जैसे देशों से भी रक्षा सहयोग बढ़ा रहा है ।
- साथ ही रूस के साथ पुराने सहयोग को भी जारी रखे हुए है।
इससे स्पष्ट है कि भारत किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहता।
अब आगे क्या हो सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में
- भारत और रूस ऊर्जा तथा व्यापार में सहयोग बढ़ा सकते हैं ।
- भारत और अमेरिका उच्च तकनीक रक्षा और निवेश के क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत कर सकते हैं।
- भारत अपनी मल्टी अलाइनमेंट नीति जारी रख सकता है जिसमें वह विभिन्न देशों के साथ अलग अलग क्षेत्रों में सहयोग करता है।
इसलिए भविष्य में प्रतिस्पर्धा और सहयोग दोनों साथ-साथ देखने को मिल सकते हैं।
निष्कर्ष
भारत और रूस के बीच बढ़ती नजदीकियां निश्चित रूप से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम हैं। इससे अमेरिका को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है लेकिन इसे केवल ट्रंप को बड़ा झटका कहकर प्रस्तुत करना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता ।
भारत की विदेश नीति का केंद्र अपने राष्ट्रीय हित हैं। यही कारण है कि वह अमेरिका रूस यूरोप जापान और अन्य देशों के साथ समानांतर रूप से संबंध मजबूत कर रहा है । यह संतुलित नीति भारत को विश्व के मंच पर अधिक स्वतंत्र और प्रभावशाली बनाती है।
आने वाले समय में भारत रूस संबंध और भारत अमेरिका संबंध दोनों ही महत्वपूर्ण बने रहने की संभावना है। विश्व के शक्ति संतुलन में भारत की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है और यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा संदेश है।
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