क्या भारत और रूस की दोस्ती जय और वीरू जैसा
क्या भारत और रूस की दोस्ती जय और वीरू जैसा
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एक नजर मे
आपको पता ही होगा की पिछले कुछ वर्षों में विश्व के राजनीति और अर्थव्यवस्था में तेजी से बदलाव देखने को मिले हैं। विशेष रूप से रूस यूक्रेन युद्ध के बाद रूस की अर्थव्यवस्था पर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार को बहुत प्रभावित किया है । इस बीच भारत ने अपनी राष्ट्रीय आवश्यकताओं और रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए रूस के साथ व्यापारिक और ऊर्जा संबंध बनाए रखे है । इसी कारण कई बार यह चर्चा होती है कि भारत के रूस के साथ बढ़ते सहयोग से अमेरिका को घबराहट क्यों दिखाई देता है।
हालांकि यह समझना जरूरी है कि इस विषय को तथ्यों के आधार पर देखा जाए । अमेरिका और भारत आज भी रक्षा तकनीक व्यापार और इंडो पैसिफिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार हैं । इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि अमेरिका भारत का विरोध कर रहा है। बल्कि अमेरिका कुछ नीतिगत चिंताएँ व्यक्त करता रहा है जबकि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है।
क्यों रूस की आर्थिक स्थिति इतना चर्चा में है
रूस पर लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों का उद्देश्य उसकी अर्थव्यवस्था और युद्ध क्षमता पर दबाव बनाना था। इन प्रतिबंधों में कई रूसी बैंकों को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली से अलग करना तकनीकी निर्यात पर रोक लगाना और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध शामिल रहे।
इसके बावजूद रूस की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त नहीं हुई उसने कई उपाय अपनाए
- एशियाई देशों के साथ व्यापार बढ़ाया
- चीन और भारत के साथ ऊर्जा निर्यात में वृद्धि की
- घरेलू उद्योगों को सरकारी सहायता दी
- वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों का उपयोग बढ़ाया
फिर भी रूस को विदेशी निवेश आधुनिक तकनीक और कुछ उद्योगों में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
अब भारत रूस का सहयोग कैसे करता है
भारत ने किसी राजनीतिक समर्थन के बजाय मुख्य रूप से आर्थिक और ऊर्जा सहयोग जारी रखा
1. रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना
रूस ने प्रतिबंधों के बाद अपने कच्चे तेल पर भारी छूट दी भारत ने इस अवसर का लाभ उठाया और बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीदा
इससे भारत को कई लाभ मिले
- ऊर्जा लागत कम हुई
- महंगाई नियंत्रित रखने में मदद मिली
- पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में बढ़ोतरी हुई
- विदेशी मुद्रा की बचत हुई
भारत का स्पष्ट कहना रहा है कि उसका पहला दायित्व अपने 140 करोड़ से अधिक नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है
2. व्यापार में इजाफा
भारत और रूस के बीच व्यापार पिछले वर्षों की तुलना में काफी बढ़ा
मुख्य आयात
- कच्चा तेल
- उर्वरक
- कोयला
- हीरे
मुख्य निर्यात
- दवाइयाँ
- मशीनरी
- कृषि उत्पाद
- रसायन
- उपभोक्ता वस्तुएँ
इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध और मजबूत हुए।
3. रक्षा क्षेत्र मे सहयोग
भारत लंबे समय से रूस से रक्षा उपकरण खरीदता रहा है।
हालांकि अब भारत अमेरिका फ्रांस और अन्य देशों से भी रक्षा खरीद बढ़ा रहा है फिर भी रूस भारत का एक महत्वपूर्ण रक्षा साझेदार बना हुआ है।
अमेरिका की चिंता क्यों बढ़ा है
यह समझना जरूरी है कि अमेरिका की चिंता केवल भारत तक सीमित नहीं है
1. प्रतिबंधों का प्रभाव कम होना
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूस पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए प्रतिबंध लगाए
यदि बड़े देश रूस से व्यापार जारी रखते हैं तो प्रतिबंधों का प्रभाव कुछ हद तक कम हो सकता है।
यही अमेरिका की प्रमुख चिंता मानी जाती है।
2. रूस के आय का साधन
रूस के सरकारी राजस्व का बड़ा हिस्सा ऊर्जा निर्यात से आता है।
जब भारत चीन और अन्य देश रूसी तेल खरीदते हैं तो रूस को निर्यात से आय मिलती रहती है
अमेरिका का मानना है कि इससे रूस की आर्थिक क्षमता बनी रहती है
3. विश्व के रणनीतिक प्रतिस्पर्धा
अमेरिका चाहता है कि उसके सहयोगी देश रूस पर दबाव बनाए रखें
लेकिन भारत किसी सैन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं है और वह अपनी विदेश नीति स्वतंत्र रूप से तय करता है।
यही अंतर कई बार मतभेद का कारण बनता है।
भारत का स्पष्ट रुख क्या है
भारत ने लगातार कहा है कि
- राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं
- ऊर्जा सुरक्षा आवश्यक है
- सस्ता तेल उपलब्ध होगा तो खरीदा जाएगा
- किसी भी देश के दबाव में निर्णय नहीं लिए जाएंगे
भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि तेल खरीदना अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में है
क्या अमेरिका भारत से नाराज़ होगा
यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा
वास्तविक स्थिति अधिक संतुलित है
भारत और अमेरिका के बीच
- रक्षा सहयोग बढ़ रहा है।
- तकनीकी साझेदारी मजबूत हो रही है।
- सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग हो रहा है।
- अंतरिक्ष कार्यक्रमों में साझेदारी बढ़ रही है।
- व्यापार लगातार बढ़ रहा है।
इसलिए दोनों देशों के बीच मतभेद होने के बावजूद संबंध मजबूत बने हुए हैं
भारत की विदेश नीति क्या है
भारत की विदेश नीति का आधार रणनीतिक स्वायत्तता है
इसका अर्थ है
भारत किसी एक शक्ति गुट पर निर्भर नहीं रहता।
भारत
- अमेरिका के साथ भी सहयोग करता है।
- रूस के साथ भी संबंध बनाए रखता है।
- फ्रांस के साथ भी रक्षा सहयोग करता है।
- जापान के साथ भी निवेश बढ़ाता है।
- खाड़ी देशों के साथ भी ऊर्जा संबंध मजबूत रखता है।
इसी नीति ने भारत की विश्व मे स्थिति मजबूत की है
क्यों रूस भारत के लिए महत्वपूर्ण लगता है
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है
रूस के लिए भारत
- बड़ा ऊर्जा बाजार है
- रक्षा साझेदार है
- निवेश का संभावित केंद्र है
- उभरती वैश्विक शक्ति है
इसी कारण रूस भारत के साथ संबंधों को प्राथमिकता देता है।
भारत को रूस से क्या लाभ होता है
भारत को कई रणनीतिक लाभ मिलते हैं
ऊर्जा सुरक्षा मे
सस्ती कीमत पर तेल उपलब्ध होने से आर्थिक दबाव कम होता है
रक्षा के क्षेत्र मे
कई महत्वपूर्ण सैन्य प्रणालियाँ अभी भी रूसी मूल की हैं
उर्वरक के क्षेत्र मे
रूस भारत को उर्वरक की आपूर्ति करता है जो कृषि के लिए महत्वपूर्ण है
परमाणु ऊर्जा मे
दोनों देश परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी लंबे समय से सहयोग कर रहे हैं
अब अमेरिका भारत के साथ संबंध क्यों बनाए रखना चाहता है
भारत आज दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाओं में से एक है
अमेरिका भारत को
- इंडो पैसिफिक क्षेत्र का महत्वपूर्ण साझेदार मानता है
- चीन के बढ़ते प्रभाव के संतुलन में अहम भूमिका वाला देश मानता है
- तकनीकी और व्यापारिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण बाजार समझता है
इसीलिए अमेरिका भारत के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना चाहता है भले ही रूस के मुद्दे पर दोनों की राय हर बार समान न हो।
भारत का रूस को क्या खुला समर्थन करता है
भारत ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बातचीत और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है
भारत ने युद्ध समाप्त करने और शांति की अपील की है
साथ ही भारत ने अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए रूस के साथ वैध व्यापार जारी रखा है
अब भविष्य की संभावनाएँ क्या है
आने वाले वर्षों में भारत की विदेश नीति संभवत इसी संतुलन पर आधारित रहेगी
- अमेरिका के साथ उच्च तकनीक और निवेश सहयोग
- रूस के साथ ऊर्जा और रक्षा संबंध
- यूरोप के साथ व्यापार।
- पश्चिम एशिया के साथ ऊर्जा साझेदारी
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग
इस संतुलित दृष्टिकोण से भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने का प्रयास कर रहा है
निष्कर्ष
रूस की आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत का सहयोग मुख्यतः ऊर्जा सुरक्षा व्यापार और दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों पर आधारित है। अमेरिका की चिंता यह है कि रूस के साथ जारी व्यापार से पश्चिमी प्रतिबंधों का प्रभाव कम हो सकता है और रूस को आर्थिक संसाधन मिलते रह सकते हैं। दूसरी ओर, भारत का कहना है कि उसकी विदेश नीति स्वतंत्र है और उसके निर्णय राष्ट्रीय हितों पर आधारित हैं।
- यह ध्यान रखना भी आवश्यक है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापक सहयोग जारी है। इसलिए इस विषय को भारत बनाम अमेरिका के रूप में देखने के बजाय अलग अलग राष्ट्रीय हितों और कूटनीतिक प्राथमिकताओं के संदर्भ में समझना अधिक उचित होगा। यही कारण है कि रूस के साथ भारत के संबंध और अमेरिका के साथ उसकी साझेदारी दोनों एक साथ आगे बढ़ रहे हैं जो भारत की बहु आयामी और संतुलित विदेश नीति का उदाहरण हैं।

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