मारा गया भारत का धूर विरोधी ईरान मे क्यों उठी खुशी की लहर और ट्रम्प हुआ लाल

 

मारा गया भारत का धूर  विरोधी  ईरान मे क्यों उठी खुशी की लहर और ट्रम्प हुआ लाल



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अमेरिकी राजनीति में कुछ नेता ऐसे होते हैं जिनका प्रभाव केवल अपने देश तक सीमित नहीं रहता बल्कि उनकी विदेश नीति पूरी दुनिया की राजनीति को प्रभावित करती है। ऐसे ही नेताओं में रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ सीनेटर लिंडसे ग्राहम का नाम शामिल था। उनकी अचानक हुई मृत्यु ने अमेरिकी राजनीति में एक बड़ा खालीपन पैदा कर दिया है। इसके साथ ही ईरान की तीखी प्रतिक्रिया और अमेरिका ईरान तनाव ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

 ये  कौन है  लिंडसे ग्राहम

लिंडसे ग्राहम अमेरिका के साउथ कैरोलाइना राज्य से रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर थे। वे लंबे समय तक अमेरिकी सीनेट में सक्रिय रहे और रक्षा तथा विदेश नीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे।

ग्राहम की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में थी जो अमेरिका की सैन्य शक्ति के उपयोग का खुलकर समर्थन करते थे। उन्होंने रूस चीन और विशेष रूप से ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनके संबंध भी काफी मजबूत माने जाते थे।

अचानक कैसे हुई मृत्यु

हाल की रिपोर्टों के अनुसार लिंडसे ग्राहम का निधन अचानक स्वास्थ्य संबंधी कारणों से हुआ  प्रारंभिक मेडिकल जांच में इसे एओर्टिक डिसेक्शन जिसको बोलते है महाधमनी में गंभीर क्षति से जुड़ी चिकित्सा आपातस्थिति बताया गया है। सोशल मीडिया पर हत्या और विदेशी साजिश से जुड़े कई दावे सामने आए, लेकिन अब तक ऐसी किसी बात की पुष्टि नहीं हुई है।

अब ईरान की प्रतिक्रिया क्या है

ग्राहम लंबे समय से ईरान के सबसे मुखर आलोचकों में थे। उन्होंने कई बार ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी सैन्य गतिविधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की थी।

इसी कारण उनकी मृत्यु के बाद ईरानी सरकारी मीडिया और विदेश मंत्रालय के कुछ अधिकारियों ने बेहद कठोर टिप्पणियाँ कीं। कुछ सरकारी मीडिया संस्थानों ने उनकी मृत्यु को  न्याय" बताया जबकि कुछ समाचार पत्रों में उनके खिलाफ तीखी भाषा का प्रयोग किया गया  

हालाँकि यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ऐसी प्रतिक्रियाएँ ईरान के आधिकारिक राजनीतिक रुख का केवल एक हिस्सा हैं और सभी ईरानी नागरिकों या नेताओं का समान दृष्टिकोण नहीं माना जा सकता।

ट्रंप के  रणनीति करीबी

लिंडसे ग्राहम ट्रंप के करीबी सहयोगियों में माने जाते थे। दोनों कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर समान विचार रखते थे।

ग्राहम की मृत्यु के बाद ट्रंप ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और सोशल मीडिया पर फैल रही साजिश संबंधी अफवाहों को खारिज किया। उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसा कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं मिला कि ट्रंप ने आग लगा दो जैसा कोई आधिकारिक बयान दिया हो।

दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन ने ईरान के प्रति अपनी कठोर नीति जारी रखी है। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य और नौसैनिक गतिविधियों को मजबूत बनाए रखा है।

अमेरिका ईरान  मे इतना तनाव क्यों बढ़ा

अमेरिका और ईरान के बीच विवाद कई वर्षों से जारी है  मुख्य कारण हैं

  • ईरान का परमाणु कार्यक्रम
  • मध्य पूर्व में दोनों देशों के अलग अलग रणनीतिक हित
  • आर्थिक प्रतिबंध
  • खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियाँ
  • इज़राइल को लेकर मतभेद

लिंडसे ग्राहम इन सभी मुद्दों पर ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई के समर्थक रहे थे  

 क्या अब  ग्राहम की मृत्यु से अमेरिकी नीतियो मे बदलाव आएगा  

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक नेता की मृत्यु से अमेरिका की पूरी विदेश नीति तुरंत नहीं बदलती।

हालाँकि ग्राहम रिपब्लिकन पार्टी के प्रभावशाली नेता थे  लेकिन अमेरिकी विदेश नीति राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद  रक्षा विभाग और कांग्रेस के सामूहिक निर्णयों से संचालित होती है

 अब भारत पर क्या प्रभाव पड़ सकता है

भारत की विदेश नीति लंबे समय से रणनीतिक संतुलन पर आधारित रही है  इसलिए भारत के लिए यह घटनाक्रम कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण हो सकता है।

1. ऊर्जा सुरक्षा मे

यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है  इसलिए तेल महंगा होने पर भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।

2. व्यापार मे

भारत का अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ बड़ा व्यापारिक संबंध है।

यदि मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ता है तो समुद्री व्यापार मार्ग प्रभावित हो सकते हैं  जिससे भारतीय निर्यात और आयात पर असर पड़ सकता है।

3. भारतीय नागरिकों की सुरक्षा मे

मध्य पूर्व में लाखों भारतीय काम करते हैं।

यदि क्षेत्रीय तनाव बढ़ता है तो भारत सरकार को अपने नागरिकों की सुरक्षा और आवश्यकता पड़ने पर निकासी की तैयारी करनी पड़ सकती है।

4. सामरिक संतुलन मे

भारत अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी बनाए रखता है  वहीं ईरान के साथ भी ऊर्जा और क्षेत्रीय संपर्क के क्षेत्र में सहयोग करता है।

इसलिए भारत संतुलित कूटनीति अपनाने की कोशिश करेगा।

क्या ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध का खतरा और बढ़ सकता  है

दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है  लेकिन पूर्ण युद्ध की संभावना का अनुमान लगाना कठिन है।

इतिहास बताता है कि कई बार तीखे बयान और सीमित सैन्य कार्रवाई के बावजूद दोनों पक्ष व्यापक युद्ध से बचने का प्रयास करते रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर प्रभाव

यदि तनाव बढ़ता है तो

  • तेल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
  • विश्व के  शेयर बाजार प्रभावित हो सकते हैं।
  • मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ सकती है।
  • अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सैन्य गतिविधियाँ तेज हो सकती हैं।
  • चीन और रूस जैसी शक्तियाँ भी अपने रणनीतिक हितों के अनुसार सक्रिय हो सकती हैं।

निष्कर्ष

लिंडसे ग्राहम की मृत्यु अमेरिकी राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। उनकी विदेश नीति  विशेषकर ईरान के प्रति कठोर रुख उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित बनाता था। उनकी मृत्यु पर ईरानी सरकारी मीडिया की प्रतिक्रिया ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को फिर चर्चा में ला दिया है। वहीं ट्रंप प्रशासन ईरान के प्रति अपनी सख्त नीति बनाए हुए दिखाई देता है।

भारत के लिए यह स्थिति सतर्कता का विषय है। ऊर्जा सुरक्षा  व्यापार भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संतुलित कूटनीति आने वाले समय में सबसे महत्वपूर्ण पहलू बने रहेंगे। भारत संभवतः अपनी पारंपरिक नीति के अनुसार दोनों पक्षों के साथ संवाद बनाए रखते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा।

 

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